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बिहार की विलुप्त हो रही कैथी और मिथिलाक्षर लिपि सीखने हेतु 20  से 26 मई 2018 तक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन इंटेक (बिहार चैप्टर), मैथिली साहित्य संस्थान, पटना, बिहार पुराविद परिषद्, पटना एवं फेसेस, पटना के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय शास्त्रीनगर स्थित पुराविद परिषद् के कार्यालय में अपराह्न 3 बजे से 6 बजे तक किया जाएगा।
प्रशिक्षण में भाग लेने हेतु फेसेस के सचिव श्रीमति सुनिता भारती से दूरभाष संख्या 9570085004 या  9471175744 अथवा facespatna@gmail.com संपर्क किया जा सकता है।

  • प्रशिक्षण निःशुल्क है परन्तु सीट सीमित हैं।
  • प्रशिक्षण में वैसे प्रतिभागियों को प्राथमिकता दी जायेगी जो कैथी एवं मिथिलाक्षर लिपि को पेशे के रूप में अपनाना चाहते हों।
  • प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं और शिक्षकों को प्राथमिकता दी जायेगी।
  • प्रशिक्षण के पश्चात प्रमाण-पत्र भी निर्गत किया जाएगा।

कैथी लिपि बिहार में लगभग एक हजार साल से प्रचलित है। जमीन से संभंधित सभी पुराने दस्तावेज कैथी लिपि में ही मिलते हैं। कैथी लिपि के प्रचलन में नहीं रहने के कारण बिहार में कई प्रकार के सांस्कृतिक ह्रास हो रहे हैं। जमीन से सम्बंधित विवादों को हाल करने में कैथी के दस्तावेजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है किन्तु इसे पढ़ाने वालों की संख्या न के बराबर रह गयी है। इसी प्रकार जिस मिथिलाक्षर से बंगला और उड़िया लिपि का विकास हुआ, उस मिथिलाक्षर लिपि को पढ़ाने वालों की संख्या भी अति अल्प रह गयी है। बिहार के बहुत से महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर, यथा शिलालेख, ताम्रपत्र, पांडुलिपियाँ, तालपत्र, पत्राचार, पंजी, एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज कैथी और मिथिलाक्षर में ही हैं किन्तु इन्हें पढ़ने वालों की संख्या नगण्य है। पहले मिथिलाक्षर की पढ़ाई विद्यालयों और महाविद्यालयों में हुआ करती थी परन्तु अब सभी बंद हो चुके हैं, अतः यह अतिआवशय्क है की इन विलुप्त होती लिपियों को बचाया जाय और अधिकाधिक संख्या में शिक्षित लोग इसे सीखें और दूसरों को भी सीखाएं।
2 जून 2018 को पटना संग्रहालय के सभागार में बिहार की विलुप्त होती लिपियों के संरक्षण हेतु एक सेमीनार का आयोजन भी होगा जिसमें कैथी, मिथिलाक्षर, भिक्षुकी एवं अन्य लिपियों के बारे में विशेषज्ञ अपना शोध पत्र प्रस्तुत करेंगें, जिसे बाद में प्रकाशित किया जाएगा। इसी सेमीनार में प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र भी वितरित किया जाएगा।