लेखक : डॉ. छोटू नारायण सिंह

निर्देशक : सुनिता भारती

प्रस्तुतकर्ता : फेसेस (फाउंडेशन फॉर आर्ट कल्चर एथिक्स एंड साइंस), पटना।

हिंदी काव्य प्रबंध की परंपरा में “जयचंद के आँसू” एक अद्भुत एवं विरल प्रयोग है। यह काव्य, ‘नायकों’ की स्तुति में लिखे गए प्रबंधों के उलट एक ‘खलनायक और देश-द्रोही’ के आत्म-ग्लानि की अभिव्यंजना है। लोक-श्रुति परंपरा के आधार पर लिखी गयी इस कृति की नाट्य प्रस्तुति का प्रधान उद्देश्य समाज, ख़ास कर युवा समाज में भारतीय संस्कृति के मूल विधायक तत्वों के साथ राष्ट्र प्रेम की भावना को संप्रेषित करना है।




जयचंद के आंसू : रिपोर्ट
कलाकार

जयचंद: कुमार विक्रम

मुहम्मद गोरी: डॉ. शंकर सुमन

Sunita Bharti

संयुक्ता: सुनीता भारती

सूत्रधार: आर. नरेन्द्र

नागरीक/वाचक: रोहन मिश्र

नागरीक कथावाचक: अंकित कुमार

तुर्क सैनिक: मो.सदरुद्दीन

नागरीक: चिन्मय माजी

नागरीक: आशुतोष सर्राफ

जयचंद की आत्मा: रवि कुमार

तुर्क सैनिक: कुंदन कुमार

संगीत : शुभम सिंह