
After completing the online registration, the candidate will be called for regular admission to the Institute within one week. However, an aspirant may also take admission directly by visiting the Institute’s office. The aspirant may download the admission form, take a printout of it, fill it in, and submit the completed form at the Institute’s office for admission.
Office address: FACES Patna, Raiji Ki Gali (Kamta Path), East Boring Canal Road, Patna – 800001, near Oro Dental Clinic.
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नाट्य-शास्त्र के महान भारतीय मनीषी, भरत-मुनि ने अभिनय को विस्तार से समझाया है और बाद के सभी लेखकों, भारतीय या यूरोपीय, ने अभिनय को परिभाषित करते हुए इसी भरत-परंपरा का पालन किया है। अभिनय को परिभाषित करते हुए संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि वास्तविक जीवन की स्थितियों और भावनाओं में अवस्थित वास्तविक पात्रों का अनुकरण ही अभिनय है। दूसरे शब्दों में, अभिनय एक कला है जो दर्शकों को उस स्थिति और भावनाओं को महसूस कराती है जो अभिनेता उन्हें महसूस कराना चाहता है। इसलिए भावनाओं का सम्प्रेषण ही अभिनय की आत्मा है।
अभिव्यक्ति अथवा विचार-सम्प्रेषण की क्षमता एक परिपूर्ण व्यक्तित्व का अनिवार्य अंग है, और, व्यक्तित्व में इस तत्व को विकसित करने का अभिनय के अतिरिक्त और कोई अधिक सुरुचिपूर्ण और प्रभावी तरीका नहीं है। व्यक्तित्व के विकास के लिए अभिनय-पाठ्यक्रम उन सभी प्रशिक्षणों की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी है, जो व्यक्तित्व-विकास प्रशिक्षण के नाम पर व्यापारिक संस्थानों द्वारा प्रदान किया जाता है। अभिनय न केवल आपकी अभिव्यक्ति और विचार-सम्प्रेषण की शक्ति को विकसित करता है, बल्कि सौंदर्य-शास्त्रीय, साहित्यिक और कलात्मक योग्यता को भी विकसित करता है जो किसी व्यक्ति की समग्र सफलता के लिए अपरिहार्य गुण हैं। यदि किसी व्यक्ति का अभिनय के प्रति स्वाभाविक झुकाव है, तो अभिनय का अध्ययन उसे फिल्मों और थिएटर में एक पेशेवर अभिनेता के रूप में स्वयं को स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
इसे नाट्य-शास्त्र के व्याकरण को समझ कर, कलात्मक प्रवृत्तियों को परिमार्जित करके और साहित्यिक तथा सौंदर्य-बोध को विकसित करके ही प्राप्त किया जा सकता है। यह एक तथ्य है कि अभिनय प्रशिक्षण व्यक्ति के चरित्र में कुछ दुर्लभ गुणों को सृजित करता है, जो गुरु-शिष्य-परंपरा के माध्यम से ही संभव है। अतः अभिनय एक भौतिक प्रशिक्षण मात्र न होकर एक आध्यात्मिक साधना की प्रक्रिया है। यही कारण है कि अभिनय को सर्वोच्च कला माना जाता है, और शिव, जो सम्पूर्णता के प्रतीक हैं, को इस कला का संरक्षक माना जाता है। इंस्टीट्यूट ऑफ एक्टिंग में अभिनय-शिक्षण की इसी शास्त्रीय परंपरा का अनुशीलन किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र में अन्यत्र अनुपलब्ध है।
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